Why Do All Questions To The Spiritual Master Sound The Same

Krishna's Mercy

[Shri Hanuman]“How can I ensure that the purpose of my task does not get destroyed? How shall I avoid mental disparity, and how do I ensure that my crossing of the ocean does not go for naught?” (Hanuman, Valmiki Ramayana, Sundara Kand, 2.41)

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Friend1: It’s good to ask questions.

Friend2: Especially when you’re trying to learn.

Friend1: I’ve noticed that even the experts ask a lot of questions.

Friend2: Such as?

Friend1: Doctors. Nurses. They are trained in the medical profession, but when they see patients the first thing they do is run through a series of questions. They don’t make assumptions. They perform a thorough investigation.

Friend2: A wise person applies discrimination. Steer clear of hasty generalizations. I believe that is one of the fallacies of logic.

Friend1: The hasty generalization? Yes. Some others are ad hominem, tu quoque, and straw…

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Do You Remember Not Being Able To Walk Or Talk

Krishna's Mercy

[spiritual world]“There is a spiritual sky, where there are innumerable spiritual planets and innumerable spiritual living entities, but those who are not fit to live in that spiritual world are sent to this material world. Voluntarily we have accepted this material body, but actually we are spirit souls who should not have accepted it. When and how we accepted it cannot be traced. No one can trace the history of when the conditioned soul first accepted the material body.” (Shrila Prabhupada, Easy Journey To Other Planets, Ch 2)

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Friend1: The living entity fell from the spiritual world.

Friend2: In the association of the Divine, as that is the very nature of anything within the spiritual energy, but suddenly a desire changed.

Friend1: I’ve heard two viewpoints relating to this.

Friend2: Which are?

Friend1: That the fall happened by chance.

Friend2: What’s the other?

Friend1:…

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Google Cloud gets a new networking algorithm that boosts Internet throughput — TechCrunch

Google today announced that TCP BBR, a new congestion control algorithm that it has used to improve network throughput from google.com and YouTube by about four percent globally (and by more than 14 percent in some countries), is now also available to its Cloud Platform users. The general idea here is to improve on the…

via Google Cloud gets a new networking algorithm that boosts Internet throughput — TechCrunch

एलियन या प्राकृतिक : अंतरिक्ष मे पायी गई विचित्र ध्वनियाँ और संकेत

विज्ञान विश्व

अंतरिक्ष मे एक खौफ़नाक सन्नाटा छाया रहता है क्योंकि ध्वनि अंतरिक्ष मे यात्रा नही कर पाती है लेकिन अंतरिक्ष शांत नही है। लगभग सभी अंतरिक्ष के पिंड ऐसे रेडीयो संकेतो का उत्सर्जन करते है जिन्हे मानव के कान सुन नही पाते है जिन्हे विशेष उपकरणो से ग्रहण किया जाता है। रेडीयो संकेतो की खोज के पश्चात से अंतरिक्ष से आने वाले कई संकेत और ध्वनियों को इन उपकरणो ने ग्रहण किया है। पिछली अर्ध सदी मे मानव द्वारा पृथ्वी बाह्य बुद्धिमत्ता की खोज(SETI) के प्रयास मे इन संकेतो के ग्रहण करने की घटना मे बढ़ोत्तरी ही हुयी है। हम इनमे से कुछ महत्वपूर्ण और अनसुलझी घटनाओं को देखेंगे।

Wow! सिगनल

15 अगस्त 1977 को ओहाइओ राज्य विश्वविद्यालय के बिग एअर(Big EAR) दूरबीन ने लगभग 200 प्रकाश वर्ष दूर से आते हुये 72 सेकंड लंबे संकेत को ग्र्हण किया था। खगोल वैज्ञानिक जेरी एहमन ने इस संकेत मे 6EQUJ5 को लाल…

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शनि के शाही वलय

विज्ञान विश्व

सभी गैस महाकाय ग्रहों के अपने वलय है लेकिन शनि के वलयों सबसे हटकर है, वे सबसे स्पष्ट, चमकदार, जटिल और शानदार वलय है। ये वलय इतने शाही और शानदार है किं शनि को सौर मंडल का आभूषण धारी ग्रह माना जाता है।


खोज

  • 1610 : गैलीलिओ गैलीली ने सर्वप्रथम शनि के वलयों को अपने द्वारा बनाई गई दूरबीन से देखा था। लेकिन वे अपनी आरंभिक दूरबीन से इनके संपूर्ण अध्ययन करने मे असमर्थ थे।
  • 1655 : क्रिश्च्नियन हायजेंस ने सबसे पहले इन वलयों को शनि के आसपास एक तश्तरी के रूप मे बताया था। उनकी दूरबीन गैलीलियो की दूरबीन से बेहतर थी।
  • 1675 : जिवोवानी डोमेनिको कैसीनी ने पाया था कि ये वलय कई वलयो से मिलकर बना है और उनके मध्य अंतराल भी है।

शोधयान

शनि के पास से चार अंतरिक्ष यान गुजरे है जिन्होने समीप से इन वलयों का अध्ययन किया है।

  1. सितंबर 1979 : पायोनियर 11 शनि…

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भौतिकविदो का इतिहास : संक्षिप्त अवलोकन

विज्ञान विश्व

किसी प्रश्न में ‘क्यों’ शब्द की उपस्थिति हमारी जिज्ञासा को व्यक्त करती है। और निश्चित तौर पर हमारी जिज्ञासा ही हमें नए तथ्यो के खोज की तरफ अग्रसर करती है। यदि न्यूटन के मन में यह जानने की जिज्ञासा न आई होती कि “आखिर, सेब नीचे ही क्यों गिरा?” तो शायद हमें गुरुत्वाकर्षण के अस्तित्व को जानने में देरी हो सकती थी। महान भौतिकविद् अल्बर्ट आइंस्टीन ने यह स्वीकार किया है कि

“मेरे अंदर कोई खास गुण नहीं है। मैं तो ऐसा व्यक्ति हूँ , जिसमें जिज्ञासा कूट-कूट कर भरी हुई है।”

यह एक स्वीकारोक्ति नहीं बल्कि मानव समाज को एक संदेश है कि नए तथ्यों के आविष्कार जिज्ञाशा से ही आती है। और वास्तव में जिज्ञाशा ही भौतिकी की जननी है। ‘ कुछ जानने की इच्छा’ ही हमें भौतिकी का आभास कराती है। और किसी प्रश्न में ‘कैसे’ शब्द की उपस्थिति हमारे कल्पना शक्ति को व्यक्त करती है। और हमारी…

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