Monthly Archives: June 2017

एलियन या प्राकृतिक : अंतरिक्ष मे पायी गई विचित्र ध्वनियाँ और संकेत

विज्ञान विश्व

अंतरिक्ष मे एक खौफ़नाक सन्नाटा छाया रहता है क्योंकि ध्वनि अंतरिक्ष मे यात्रा नही कर पाती है लेकिन अंतरिक्ष शांत नही है। लगभग सभी अंतरिक्ष के पिंड ऐसे रेडीयो संकेतो का उत्सर्जन करते है जिन्हे मानव के कान सुन नही पाते है जिन्हे विशेष उपकरणो से ग्रहण किया जाता है। रेडीयो संकेतो की खोज के पश्चात से अंतरिक्ष से आने वाले कई संकेत और ध्वनियों को इन उपकरणो ने ग्रहण किया है। पिछली अर्ध सदी मे मानव द्वारा पृथ्वी बाह्य बुद्धिमत्ता की खोज(SETI) के प्रयास मे इन संकेतो के ग्रहण करने की घटना मे बढ़ोत्तरी ही हुयी है। हम इनमे से कुछ महत्वपूर्ण और अनसुलझी घटनाओं को देखेंगे।

Wow! सिगनल

15 अगस्त 1977 को ओहाइओ राज्य विश्वविद्यालय के बिग एअर(Big EAR) दूरबीन ने लगभग 200 प्रकाश वर्ष दूर से आते हुये 72 सेकंड लंबे संकेत को ग्र्हण किया था। खगोल वैज्ञानिक जेरी एहमन ने इस संकेत मे 6EQUJ5 को लाल…

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शनि के शाही वलय

विज्ञान विश्व

सभी गैस महाकाय ग्रहों के अपने वलय है लेकिन शनि के वलयों सबसे हटकर है, वे सबसे स्पष्ट, चमकदार, जटिल और शानदार वलय है। ये वलय इतने शाही और शानदार है किं शनि को सौर मंडल का आभूषण धारी ग्रह माना जाता है।


खोज

  • 1610 : गैलीलिओ गैलीली ने सर्वप्रथम शनि के वलयों को अपने द्वारा बनाई गई दूरबीन से देखा था। लेकिन वे अपनी आरंभिक दूरबीन से इनके संपूर्ण अध्ययन करने मे असमर्थ थे।
  • 1655 : क्रिश्च्नियन हायजेंस ने सबसे पहले इन वलयों को शनि के आसपास एक तश्तरी के रूप मे बताया था। उनकी दूरबीन गैलीलियो की दूरबीन से बेहतर थी।
  • 1675 : जिवोवानी डोमेनिको कैसीनी ने पाया था कि ये वलय कई वलयो से मिलकर बना है और उनके मध्य अंतराल भी है।

शोधयान

शनि के पास से चार अंतरिक्ष यान गुजरे है जिन्होने समीप से इन वलयों का अध्ययन किया है।

  1. सितंबर 1979 : पायोनियर 11 शनि…

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