समाज के विकास में आबादी की भूमिका – २

समय के साये में

हे मानवश्रेष्ठों,

समाज और प्रकृति के बीच की अंतर्क्रिया, संबंधों को समझने की कोशिशों के लिए यहां पर प्रकृति और समाज पर एक छोटी श्रृंखला प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने समाज के विकास में आबादी की भूमिका पर चर्चा शुरू की थी, इस बार हम उसी चर्चा का समापन करेंगे ।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां इस श्रृंखला में, उपलब्ध ज्ञान का सिर्फ़ समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


समाज के विकास में आबादी की भूमिका – २
( the role of population in the development of society – 2 )

7723808_orig_0उत्पादन पद्धति तथा उसके संनियमन ( governing ) के प्रतिमान ( pattern ) ही आबादी की वृद्धि के प्रतिमानों तथा उसकी संरचना पर निर्धारक प्रभाव क्यों डालते हैं? ऐतिहासिक भौतिकवाद इस प्रश्न का उत्तर भी देता है। मुद्दा यह है कि मनुष्य मुख्य उत्पादक…

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