कुल्हाडी की छाया में उम्मीद

KAFILA - 10 years of a common journey

‘शब्द हिरासत में हैं और हत्यारे खुलेआम घुम रहे हैं’

( Photo Courtesy : freethinker.co.uk, Martyr Rajib Haider who was killed by the Islamists on 15 th February 2013)

आम दिनों में ऐसे बयानों पर कोई गौर नहीं करता, मगर एक ऐसे समय में जबकि आप के कई साथी इस्लामिस्टों के हाथों मारे गए हों और उनके द्वारा जारी हिट लिस्ट में आप का नाम भी शुमार हो और उधर अपने आप को सेक्युलर कहलानेवाली सरकार भी  इन आततायियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी ऐसी कोई उम्मीद नहीं दिखती तो, उस पृष्ठ भूमि में तीन ब्लागर्स द्वारा अपना नाम लेकर जारी किया गया एक बयान विद्रोह की आवाज़ को नए सिरेसे बुलन्द करना है। (http://sacw.net/article12741.html)

कुल्हाडी की छाया में उम्मीद’ यही शीर्षक है उस पत्र का जो बांगलादेश के युवा ब्लॉगर और लेखक आरिफ जेबतिक ने लिखा है। सरकार की समझौतापरस्ती की आलोचना करते हुए वह लिखते हैं कि ‘जब किसी नागरिक…

View original post 2,491 more words

Advertisements