अपनी अंतिम उड़ान पर ‘डिस्कवरी’

अंतरिक्ष

अपनी अंतिम उड़ान के लिये तैयार डिस्कवरी

डिस्कवरी अपनी अंतिम उड़ान पर

सितंबर १९८८ मे डिस्कवरी ने दोबारा उड़ान भरी थी, चैलेंजर दुर्घटना के बाद अंतरिक्ष शटल की यह पहली उड़ान थी। इस अवसर पर ‘विज्ञान प्रगति’ का एक अंतरिक्ष विशेषांक आया था। अंतरिक्ष और खगोलशास्त्र मे मेरी रूची इस उड़ान के बाद ही जागृत हुयी थी। इसके बाद विज्ञान प्रगति मे ही श्री देवेन्द्र मेवाड़ी की सौर मंडल पर एक लेख श्रंखला ने मेरी इस रूची को स्थायित्व दिया था।
आज डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल अपनी अंतिम उड़ान भर चूका है, एक युग का अंत होने जा रहा है।

डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल  का नाम कैप्टन जेम्स कूक की तीसरी और अंतिम यात्रा के ब्रिटिश जहाज एच एम एस डिस्कवरी पर रखा गया था। इस का निर्माण कार्य जनवरी १९७९ मे प्रारंभ हुआ था। इस यान की पहली उड़ान ३० अगस्त १९८४ मे हुयी थी।

डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल ने ही हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन को स्थापित किया था। इस दूरबीन की दूसरी और तीसरी मरम्मत…

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