T-22/34 दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के ….मयंक अवस्थी

तीरगी !! तुझको बिखर जाना है
शब को ताहद्दे सहर जाना है

चाँद तारों से हमें क्या हासिल ?!!
रात का रूप संवर जाना है

आग की राहगुज़र आ ही गई
मुझको अब और निखर जाना है

ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
उसके कूचे से गुज़र जाना है

कब ये पूछा है किसी सूरज ने
उसकी किरनों को किधर जाना है

दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के
“आज हर हद से गुज़र जाना है”

हम तो काबा भी चले जायें, वले
दिल ये जायेगा जिधर जाना है

मयंक अवस्थी (8765213905)

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