Monthly Archives: October 2014

त्रिलोकपुरी में शांति है!

kafila chal padhahai ek nai raah par

KAFILA - COLLECTIVE EXPLORATIONS SINCE 2006

आशंकाओं के द्वीप

त्रिलोकपुरी में शांति है. त्रिलोकपुरी में तनाव है. त्रिलोकपुरी में स्थिति नियंत्रण में है. नियंत्रित तनाव की शांति भी नियंत्रित ही होती है. बीच-बीच में अफवाहें उड़ती हैं और लोग सावधान हो जाते हैं. पुलिस की गश्त बढ़ जाती है.

दीवाली की रात से सक्रिय हिंसा शुरू हुई. लेकिन यह हिंसा भी नियंत्रित थी. सिर्फ ईंटों के टुकड़े बरसाए जा रहे थे.त्रिलोकपुरी की सड़कें इन टुकड़ों और कांच से आज भी इस कदर पटी पड़ी हैं कि उनसे बचकर आप पैदल भी नहीं चल सकते. प्रशासन एकसाथ शांति कायम रखने और सडकों को साफ कराने का काम नहीं कर सकता, भले ही स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के लिए पत्रकार अपनी कलम को झाड़ू बना चुके हों. ताज्जुब सोचकर होता है कि इतनी ईंटें अचानक कहाँ से आ गई होंगी.

शांति है. धारा एक सौ चवालीस लगी है. अपनी दीवाली खराब करके सैकड़ों पुलिसकर्मी गश्त लगा रहे…

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प्रेम भरे दो जीवन…

kahani hi bankar rah jaata hai,jivan

स्वार्थ

LoveStoryदोस्तों के आने से काफी पहले ही विक्टर रेस्त्रां पहुँच गया था| अंदर प्रवेश किया तो पाया कि पूरे रेस्त्रां में सिर्फ एक वृद्ध एक कोने में बैठा अकेले ही खा रहा था| थोड़ा नजदीक गया तो पाया कि उसने सामने मेज पर एक महिला की तस्वीर रखी हुयी थी और वह उस तस्वीर को लगातार देखते हुए खा रहा था|

विक्टर को लगा कि वृद्ध अवसाद से ग्रस्त है और तस्वीर में मौजूद महिला उसकी कोई खास रही होगी और शायद अब इस दुनिया में नहीं है और उसकी याद में वृद्ध दुखी है| उसने सोचा कि जब तक उसके दोस्त नहीं आते वह वृद्ध से बातें करके उसका मूड ठीक कर सकता है|

विक्टर वृद्ध के पास चला गया|

“माफ कीजिये, मैं थोड़ी देर आपके पास बैठ सकता हूँ?”

वृद्ध ने उसकी तरफ देखा, कुछ पल सोचा और कहा, “आओ बैठो यंगमैन”|

विक्टर ने तस्वीर की ओर इशारा…

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राजा रावण हो या राम…कोई फर्क नहीं पड़ता

samaj ki vyatha ,,kase kase chhre,,

स्वार्थ

कोई फर्क नहीं पड़ता
इस देश में राजा रावण हो या राम
जनता तो बेचारी सीता है
रावण राजा हुआ तो वनवास से
चोरी चली जाएगी
और राम राजा हुआ तो
अग्नि परीक्षा के बाद फिर वनवास में भेज
दी जाएगी।


कोई फर्क नहीं पड़ता इस देश में राजा कौरव
हो या पांडव
जनता तो बेचारी द्रौपदी है
कौरव राजा हुए तो चीर हरण के काम
आयेगी
और पांडव राजा हुए तो जुए में हार
दी जाएगी।


कोई फर्क नहीं पड़ता
इस देश में राजा हिन्दू हो या मुसमान
जनता तो बेचारी लाश है
हिन्दू राजा हुआ तो जला दी जाएगी
और मुसलमान राजा हुआ
तो दफना दी जाएगी

(सुरेन्द्र शर्मा)

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What inspires you?

The Why About This

Yellow WarblerA Beautiful Bird in it’s Natural Setting is inspiring!

Seriously, have you given any thought recently to what inspires you the most?

It’s important and necessary in your life to be inspired by others. Inspiration is the emotional fuel that keeps you going on those hard days. Whether it be a word or deed from someone you know or someone/thing you’ve heard or read about, it makes no difference. It’s the “something” that so moves you emotionally, (in a positive way) that life seems a little better, and more doable in that moment.

For me, what inspires are the following:

Love inspires me. Beauty inspires me. Bravery inspires me. The human spirit of never giving up inspires caringme. Tenderness inspires me. Happiness inspires me. Caring people making a difference inspires me. Thoughtfulness inspires me.

ForestA smile inspires me. A mother and/or father caring for their family inspires me. Children Inspire me…

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T-20/29 तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं-नवीन सी. चतुर्वेदी

तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं
दिल तेरी बज़्म को दिलदार सम्हाले हुये हैं

इश्क़ एक ऐसी अदालत है जिसे जनमों से
उस के अपने ही गुनहगार सम्हाले हुये हैं

जब भी गुलशन से गुजरता हूँ ख़याल आता है
बे-वफ़ाओं को वफ़ादार सम्हाले हुये हैं

तोड़ ही देती अदावत तो न जाने कब का
प्यार के तारों को फ़नकार सम्हाले हुये हैं

बीसियों लोग हैं घर-बार सम्हाले हुये और
बीसियों लोगों को घर-बार सम्हाले हुये हैं

नवीन सी. चतुर्वेदी 09967024593

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T-20/30 रम्ज़ की राह की रफ़्तार सम्हाले हुये हैं-नवीन सी. चतुर्वेदी-दूसरी ग़ज़ल

रम्ज़ की राह की रफ़्तार सम्हाले हुये हैं
वाक़ई आप तो बाज़ार सम्हाले हुये हैं

हम से उठता ही नहीं बोझ पराये ग़म का
हम तो बस अपने ही विस्तार सम्हाले हुये हैं

एक दिन ख़ुद को सजाना है तेरे ज़ख़्मों से
इसलिये सारे अलंकार सम्हाले हुये हैं

आह, अरमान, तलाश और तसल्ली का भरम
अपना सन्सार यही चार सम्हाले हुये हैं

वो सुधर जायें तो शुरूआत सुधरने की हो
अरबों-खरबों को जो दो-चार सम्हाले हुये हैं

नवीन सी. चतुर्वेदी 09967024593

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