साँझ के साए

शब्दो के संयोजन गुथ दी एक माला ,

हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-'हाइकु कविताओं की वेब पत्रिका'-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !

1-सुभाष लखेड़ा

16-1 thunth1

तमाम दिन

कोई तो बात करे

तरसे मन।

2

कौन अपना

अपने गए दूर

टूटा सपना।

3

व्यस्त हैं सभी

मुँह मोड़ लेते हैं

मिलें जो कभी ।

4

नए हालात

करते दिन रात

खुद से बात।

5

अकेलापन

वृद्ध जनों से पूछो

क्या कहे मन।

-0-

2-अनिताललित

1

माँ सिसकती

आँगन हुड़कता,

हो बेटी विदा।

2

साँझ के साए

उदासियों में डूबे

दिल में ढले।

3

मन की बात

मन से ही कह दी

कोई न पास।

4

नीड़ उदास

उड़ गए हैं पंछी

बिखरी आस।

5

ढलती उम्र

शरीर साथ छोड़े,

अपने तोड़ें।

-0-

3-डॉज्योत्स्नाशर्मा

1

एकाकी मन

ढूँढ लाया यादों के

साथी हज़ार ।

2

निविड तम

कोई न संग– साथ

रात उदास ।

3

अकेले कहाँ?

यादों के थे चिराग़

जलते रहे ।

4

मुँदी पलकें

मिलन या जुदाई

कह न पाई ।

-0-

4

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